• Home
  • Details

Tulsidas

      STD-VI     January 24, 2021, 12:43 am    tulsidas    1380.94

Introduction

.

Downloads 28 Times

2 comments to this document

Post your comment Cancel  

  1. 12-3073

    on January 25, 2021, 8:41 am - Reply

    Students Comment : MA`AM SOME OF IT I TOOK FROM MY MOTHER`S COLLAGE BOOK AND FROM INTERNET WED SEARCH ABOUT गोस्वामी तुलसीदास JI .... JO MAINE JANA WOH MAINE APPKO KAHA ....

    Parents Feedback :

  2. 12-3073

    on January 25, 2021, 8:38 am - Reply

    Students Comment : गोस्वामी तुलसीदास (1511 - 1623) हिंदी साहित्य के महान कवि थे। इन्हें आदि काव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है। श्रीरामचरितमानस का कथानक रामायण से लिया गया है। रामचरितमानस लोक ग्रन्थ है और इसे उत्तर भारत में बड़े भक्तिभाव से पढ़ा जाता है। इसके बाद विनय पत्रिका उनका एक अन्य महत्त्वपूर्ण काव्य है। महाकाव्य श्रीरामचरितमानस को विश्व के 100 सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्यों में 46वाँ स्थान दिया गया।इनका जन्म स्थान विवादित है। कुछ लोग मानते हैं की इनका जन्म सोरों शूकरक्षेत्र, वर्तमान में कासगंज (एटा) उत्तर प्रदेश में हुआ था।[3] कुछ विद्वान् इनका जन्म राजापुर जिला बाँदा (वर्तमान में चित्रकूट) में हुआ मानते हैं। जबकि कुछ विद्वान तुलसीदास का जन्म स्थान राजापुर को मानने के पक्ष में हैं। राजापुर उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला के अंतर्गत स्थित एक गाँव है। वहाँ आत्माराम दुबे नाम के एक प्रतिष्ठित संध्या नंददास भक्तिकाल में पुष्टिमार्गीय अष्टछाप के कवि नंददास जी का जन्म जनपद- कासगंज के सोरों शूकरक्षेत्र अन्तर्वेदी रामपुर (वर्त्तमान- श्यामपुर) गाँव निवासी भरद्वाज गोत्रीय सनाढ्य ब्राह्मण पं० सच्चिदानंद शुक्ल के पुत्र पं० जीवाराम शुक्ल की पत्नी चंपा के गर्भ से सम्वत्- 1572 विक्रमी में हुआ था। पं० सच्चिदानंद के दो पुत्र थे, पं० आत्माराम शुक्ल और पं० जीवाराम शुक्ल। पं० आत्माराम शुक्ल एवं हुलसी के पुत्र का नाम महाकवि गोस्वामी तुलसीदास था, जिन्होंने श्रीरामचरितमानस महाग्रंथ की रचना की थी। नंददास जी के छोटे भाई का नाम चँदहास था। नंददास जी, तुलसीदास जी के सगे चचेरे भाई थे। नंददास जी के पुत्र का नाम कृष्णदास था। नंददास ने कई रचनाएँ- रसमंजरी, अनेकार्थमंजरी, भागवत्-दशम स्कंध, श्याम सगाई, गोवर्द्धन लीला, सुदामा चरित, विरहमंजरी, रूप मंजरी, रुक्मिणी मंगल, रासपंचाध्यायी, भँवर गीत, सिद्धांत पंचाध्यायी, नंददास पदावली हैं। ब्राह्मण रहते थे। उनकी धर्मपत्नी का नाम हुलसी था। संवत्1511के श्रावण मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र में इन्हीं दम्पति के यहाँ तुलसीदास का जन्म हुआ। प्रचलित जनश्रुति के अनुसार शिशु बारह महीने तक माँ के गर्भ में रहने के कारण अत्यधिक हृष्ट पुष्ट था और उसके मुख में दाँत दिखायी दे रहे थे। जन्म लेने के साथ ही उसने राम नाम का उच्चारण किया जिससे उसका नाम रामबोला पड़ गया। उनके जन्म के दूसरे ही दिन माँ का निधन हो गया। पिता ने किसी और अनिष्ट से बचने के लिये बालक को चुनियाँ नाम की एक दासी को सौंप दिया और स्वयं विरक्त हो गये। जब रामबोला साढे पाँच वर्ष का हुआ तो चुनियाँ भी नहीं रही। वह गली-गली भटकता हुआ अनाथों की तरह जीवन जीने को विवश हो गया।भगवान शंकरजी की प्रेरणा से रामशैल पर रहनेवाले श्री अनन्तानन्द जी के प्रिय शिष्य श्रीनरहर्यानन्द जी (नरहरि बाबा) ने इस रामबोला के नाम से बहुचर्चित हो चुके इस बालक को ढूँढ निकाला और विधिवत उसका नाम तुलसीराम रखा[4]। तदुपरान्त वे उसे अयोध्या (उत्तर प्रदेश) ले गये और वहाँ संवत्‌ 1561 माघ शुक्ला पंचमी (शुक्रवार) को उसका यज्ञोपवीत-संस्कार सम्पन्न कराया। संस्कार के समय भी बिना सिखाये ही बालक रामबोला ने गायत्री-मन्त्र का स्पष्ठ उच्चारण किया, जिसे देखकर सब लोग चकित हो गये। इसके बाद नरहरि बाबा ने वैष्णवों के पाँच संस्कार करके बालक को राम-मन्त्र की दीक्षा दी और अयोध्या में ही रहकर उसे विद्याध्ययन कराया। बालक रामबोला की बुद्धि बड़ी प्रखर थी। वह एक ही बार में गुरु-मुख से जो सुन लेता, उसे वह कंठस्थ हो जाता। वहाँ से कुछ काल के बाद गुरु-शिष्य दोनों शूकरक्षेत्र (सोरों) पहुँचे। वहाँ नरहरि बाबा ने बालक को राम-कथा सुनायी किन्तु वह उसे भली-भाँति समझ न आयी। ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी, गुरुवार, संवत् 1583 को 29 वर्ष की आयु में राजापुर से थोडी ही दूर यमुना के उस पार स्थित एक गाँव की अति सुन्दरी भारद्वाज गोत्र की कन्या रत्नावली के साथ उनका विवाह हुआ। चूँकि गौना नहीं हुआ था अत: कुछ समय के लिये वे काशी चले गये और वहाँ शेषसनातन जी के पास रहकर वेद-वेदांग के अध्ययन में जुट गये। वहाँ रहते हुए अचानक एक दिन उन्हें अपनी पत्नी की याद आयी और वे व्याकुल होने लगे। जब नहीं रहा गया तो गुरूजी से आज्ञा लेकर वे अपनी जन्मभूमि राजापुर लौट आये। पत्नी रत्नावली चूँकि मायके में ही थी क्योंकि तब तक उनका गौना नहीं हुआ था अत: तुलसीराम ने भयंकर अँधेरी रात में उफनती यमुना नदी तैरकर पार की और सीधे अपनी पत्नी के शयन-कक्ष में जा पहुँचे। रत्नावली इतनी रात गये अपने पति को अकेले आया देख कर आश्चर्यचकित हो गयी। उसने लोक-लाज के भय से जब उन्हें चुपचाप वापस जाने को कहा तो वे उससे उसी समय घर चलने का आग्रह करने लगे। उनकी इस अप्रत्याशित जिद से खीझकर रत्नावली ने स्वरचित एक दोहे के माध्यम से जो शिक्षा उन्हें दी उसने ही तुलसीराम को तुलसीदास बना दिया। रत्नावली ने जो दोहा कहा था वह इस प्रकार है: अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति ! नेकु जो होती राम से, तो काहे भव-भीत ? यह दोहा सुनते ही उन्होंने उसी समय पत्नी को वहीं उसके पिता के घर छोड़ दिया और वापस अपने गाँव राजापुर लौट गये। राजापुर में अपने घर जाकर जब उन्हें यह पता चला कि उनकी अनुपस्थिति में उनके पिता भी नहीं रहे और पूरा घर नष्ट हो चुका है तो उन्हें और भी अधिक कष्ट हुआ। उन्होंने विधि-विधान पूर्वक अपने पिता जी का श्राद्ध किया और गाँव में ही रहकर लोगों को भगवान राम की कथा सुनाने लगे।कुछ काल राजापुर रहने के बाद वे पुन: काशी चले गये और वहाँ की जनता को राम-कथा सुनाने लगे। कथा के दौरान उन्हें एक दिन मनुष्य के वेष में एक प्रेत मिला, जिसने उन्हें हनुमान ‌जी का पता बतलाया। हनुमान ‌जी से मिलकर तुलसीदास ने उनसे श्रीरघुनाथजी का दर्शन कराने की प्रार्थना की। हनुमान्‌जी ने कहा- "तुम्हें चित्रकूट में रघुनाथजी दर्शन होंगें।" इस पर तुलसीदास जी चित्रकूट की ओर चल पड़े। चित्रकूट पहुँच कर उन्होंने रामघाट पर अपना आसन जमाया। एक दिन वे प्रदक्षिणा करने निकले ही थे कि यकायक मार्ग में उन्हें श्रीराम के दर्शन हुए। उन्होंने देखा कि दो बड़े ही सुन्दर राजकुमार घोड़ों पर सवार होकर धनुष-बाण लिये जा रहे हैं। तुलसीदास उन्हें देखकर आकर्षित तो हुए, परन्तु उन्हें पहचान न सके। तभी पीछे से हनुमान जी ने आकर जब उन्हें सारा भेद बताया तो वे पश्चाताप करने लगे। इस पर हनुमान जी ने उन्हें सात्वना दी और कहा प्रातःकाल फिर दर्शन होंगे। संवत्‌ 1607 की मौनी अमावस्या को बुधवार के दिन उनके सामने भगवान श्रीराम|भगवान श्री राम जी पुनः प्रकट हुए। उन्होंने बालक रूप में आकर तुलसीदास से कहा-"बाबा! हमें चन्दन चाहिये क्या आप हमें चन्दन दे सकते हैं?" हनुमान ‌जी ने सोचा, कहीं वे इस बार भी धोखा न खा जायें, इसलिये उन्होंने तोते का रूप धारण करके यह दोहा कहा: चित्रकूट के घाट पर, भइ सन्तन की भीर। तुलसिदास चन्दन घिसें, तिलक देत रघुबीर॥ तुलसीदास भगवान श्री राम जी की उस अद्भुत छवि को निहार कर अपने शरीर की सुध-बुध ही भूल गये। अन्ततोगत्वा भगवान ने स्वयं अपने हाथ से चन्दन लेकर अपने तथा तुलसीदास जी के मस्तक पर लगाया और अन्तर्ध्यान हो गये।संवत् १६२८ में वह हनुमान जी की आज्ञा लेकर अयोध्या की ओर चल पड़े। उन दिनों प्रयाग में माघ मेला लगा हुआ था। वे वहाँ कुछ दिन के लिये ठहर गये। पर्व के छः दिन बाद एक वटवृक्ष के नीचे उन्हें भारद्वाज और याज्ञवल्क्य मुनि के दर्शन हुए। वहाँ उस समय वही कथा हो रही थी, जो उन्होने सूकरक्षेत्र में अपने गुरु से सुनी थी। माघ मेला समाप्त होते ही तुलसीदास जी प्रयाग से पुन: वापस काशी आ गये और वहाँ के प्रह्लादघाट पर एक ब्राह्मण के घर निवास किया। वहीं रहते हुए उनके अन्दर कवित्व-शक्ति का प्रस्फुरण हुआ और वे संस्कृत में पद्य-रचना करने लगे। परन्तु दिन में वे जितने पद्य रचते, रात्रि में वे सब लुप्त हो जाते। यह घटना रोज घटती। आठवें दिन तुलसीदास जी को स्वप्न हुआ। भगवान शंकर ने उन्हें आदेश दिया कि तुम अपनी भाषा में काव्य रचना करो। तुलसीदास जी की नींद उचट गयी। वे उठकर बैठ गये। उसी समय भगवान शिव और पार्वती उनके सामने प्रकट हुए। तुलसीदास जी ने उन्हें साष्टांग प्रणाम किया। इस पर प्रसन्न होकर शिव जी ने कहा- "तुम अयोध्या में जाकर रहो और हिन्दी में काव्य-रचना करो। मेरे आशीर्वाद से तुम्हारी कविता सामवेद के समान फलवती होगी।" इतना कहकर गौरीशंकर अन्तर्धान हो गये। तुलसीदास जी उनकी आज्ञा शिरोधार्य कर काशी से सीधे अयोध्या चले गये।संवत्‌ १६३१ का प्रारम्भ हुआ। दैवयोग से उस वर्ष रामनवमी के दिन वैसा ही योग आया जैसा त्रेतायुग में राम-जन्म के दिन था। उस दिन प्रातःकाल तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस की रचना प्रारम्भ की। दो वर्ष, सात महीने और छ्ब्बीस दिन में यह अद्भुत ग्रन्थ सम्पन्न हुआ। संवत्‌ १६३३ के मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में राम-विवाह के दिन सातों काण्ड पूर्ण हो गये। तुलसीदास पर भारत सरकार द्वारा जारी डाक टिकट इसके बाद भगवान की आज्ञा से तुलसीदास जी काशी चले आये। वहाँ उन्होंने भगवान विश्वनाथ और माता अन्नपूर्णा को श्रीरामचरितमानस सुनाया। रात को पुस्तक विश्वनाथ-मन्दिर में रख दी गयी। प्रात:काल जब मन्दिर के पट खोले गये तो पुस्तक पर लिखा हुआ पाया गया-सत्यं शिवं सुन्दरम्‌ जिसके नीचे भगवान शंकर की सही (पुष्टि) थी। उस समय वहाँ उपस्थित लोगों ने "सत्यं शिवं सुन्दरम्‌" की आवाज भी कानों से सुनी। इधर काशी के पण्डितों को जब यह बात पता चली तो उनके मन में ईर्ष्या उत्पन्न हुई। वे दल बनाकर तुलसीदास जी की निन्दा और उस पुस्तक को नष्ट करने का प्रयत्न करने लगे। उन्होंने पुस्तक चुराने के लिये दो चोर भी भेजे। चोरों ने जाकर देखा कि तुलसीदास जी की कुटी के आसपास दो युवक धनुषबाण लिये पहरा दे रहे हैं। दोनों युवक बड़े ही सुन्दर क्रमश: श्याम और गौर वर्ण के थे। उनके दर्शन करते ही चोरों की बुद्धि शुद्ध हो गयी। उन्होंने उसी समय से चोरी करना छोड़ दिया और भगवान के भजन में लग गये। तुलसीदास जी ने अपने लिये भगवान को कष्ट हुआ जान कुटी का सारा समान लुटा दिया और पुस्तक अपने मित्र टोडरमल (अकबर के नौरत्नों में एक) के यहाँ रखवा दी। इसके बाद उन्होंने अपनी विलक्षण स्मरण शक्ति से एक दूसरी प्रति लिखी। उसी के आधार पर दूसरी प्रतिलिपियाँ तैयार की गयीं और पुस्तक का प्रचार दिनों-दिन बढ़ने लगा। इधर काशी के पण्डितों ने और कोई उपाय न देख श्री मधुसूदन सरस्वती नाम के महापण्डित को उस पुस्तक को देखकर अपनी सम्मति देने की प्रार्थना की। मधुसूदन सरस्वती जी ने उसे देखकर बड़ी प्रसन्नता प्रकट की और उस पर अपनी ओर से यह टिप्पणी लिख दी- आनन्दकानने ह्यास्मिंजंगमस्तुलसीतरुः। कवितामंजरी भाति रामभ्रमरभूषिता॥ इसका हिन्दी में अर्थ इस प्रकार है-"काशी के आनन्द-वन में तुलसीदास साक्षात तुलसी का पौधा है। उसकी काव्य-मंजरी बड़ी ही मनोहर है, जिस पर श्रीराम रूपी भँवरा सदा मँडराता रहता है।" पण्डितों को उनकी इस टिप्पणी पर भी संतोष नहीं हुआ। तब पुस्तक की परीक्षा का एक अन्य उपाय सोचा गया। काशी के विश्वनाथ-मन्दिर में भगवान विश्वनाथ के सामने सबसे ऊपर वेद, उनके नीचे शास्त्र, शास्त्रों के नीचे पुराण और सबके नीचे रामचरितमानस रख दिया गया। प्रातःकाल जब मन्दिर खोला गया तो लोगों ने देखा कि श्रीरामचरितमानस वेदों के ऊपर रखा हुआ है। अब तो सभी पण्डित बड़े लज्जित हुए। उन्होंने तुलसीदास जी से क्षमा माँगी और भक्ति-भाव से उनका चरणोदक लिया।तुलसीदास जी जब काशी के विख्यात् घाट असीघाट पर रहने लगे तो एक रात कलियुग मूर्त रूप धारण कर उनके पास आया और उन्हें पीड़ा पहुँचाने लगा। तुलसीदास जी ने उसी समय हनुमान जी का ध्यान किया। हनुमान जी ने साक्षात् प्रकट होकर उन्हें प्रार्थना के पद रचने को कहा, इसके पश्चात् उन्होंने अपनी अन्तिम कृति विनय-पत्रिका लिखी और उसे भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। श्रीराम जी ने उस पर स्वयं अपने हस्ताक्षर कर दिये और तुलसीदास जी को निर्भय कर दिया। संवत्‌ १६८० में श्रावण कृष्ण तृतीया शनिवार को तुलसीदास जी ने "राम-राम" कहते हुए अपना शरीर परित्याग किया।तुलसीदास जी की हस्तलिपि अत्यधिक सुन्दर थी लगता है जैसे उस युग में उन्होंने कैलोग्राफी की कला आती थी। उनके जन्म-स्थान राजापुर के एक मन्दिर में श्रीरामचरितमानस के अयोध्याकाण्ड की एक प्रति सुरक्षित रखी हुई है। by FALGUNI GHOSAL

    Parents Feedback :

Other document by this teacher

  • Santo ki vaani/6-02-2022
  • Santo ki Vani/ Hindi 3rd/30-1-2022
  • papita kaand (exercise),Surdas ke pad /23-12-2022
  • Papiya kaand(16-01-2022)
  • 02-01-2022
  • Case Study/02-01-2022
  • Case study /02-01-2022
  • Case study (19-12-2021)
  • Kittur ki Rani CHENAMMA/05-12-2021
  • Case study/22-11-2021
  • Case study/14-11-21
  • Hindi 3rd language/31-10-21
  • Case study/24-10-21/Hindi3rd lang
  • Revision work (Hindi 3rd lang)
  • Khag udte rahna(Hindi 3rd lang) 29-08-21
  • Case study/HINDI 3rd lang 29-08-21
  • Case study/HINDI 3rd lang
  • Case study/ Hindi 3rd lang/(21-08-21)
  • Yaksha prashna (14-08-21) Hindi 3rd lang
  • Yaksha prashna (8-08-21) Hindi 3rd lang
  • यक्ष प्रश्न, Hindi 3rd language,(25-7-21)
  • Jaise ko taisa 18-07-21
  • Jaise ko taisa(class 8hindi 3rd Lang)(27-06-21)
  • Jaise ko taisa(class 8hindi 3rd Lang)/13-06
  • Jaise ko taisa(class 8hindi 3rd Lang)
  • Apna sthan sham banaye/Hindi 3rd Lang/Class-VIII
  • Apna sthan svyam banayiya (16-05-21)
  • अपना स्थान स्वयं बनाए (अभ्यास )(9-05-21) Hindi third language
  • Aa rahi Ravi ki sawari (25-04-21)
  • As rahi Ravi ki sawari (18-04-21)
  • Comprehension/hin2nd lang/Class 6/25-02-21
  • Writing /24-02-21
  • Karak/class6/Hindi 2nd lang/22-02-21
  • Revision chapters/22-02-21
  • कारक (अभ्यास कार्य)
  • Comprehension/hin2nd lang/Class 6/ 18-02-21
  • Vaachya/17-02-21exercise
  • Vaachya/17-02-22
  • Revision-jaadu
  • Apathith gadyansh/14-02-21
  • Visheshan/11.02.2021
  • Sangya’/10-02-2021
  • Jaadu/hindi3rd/class VIII/10-02-2021)
  • Jaadu/hindi3rd/class VIII
  • Home WOrk/class6/Hin 2nd
  • Jaadu/question answer/hindi3rd lang
  • Bhasa revision/ Hindi2nd Lang
  • Viram chihn a/07-02-2021
  • Viram chihn/ exercise
  • Panch parmeshwar/hindi3rd lang/02-02-2021
  • Panch parmeshwar/hindi3rd lang01-02-2021
  • Comprehension/hin2nd lang/Class 6/1-02-2021
  • Van ke marg me-question answer
  • Van ke marg me2
  • Tulsidas
  • Anuchhed/class6/Hin2nd lang/21.01.2021
  • Panch parmeshwar/hindi3rd lang/20.1.2021
  • Panch parmeshwar/hindi3rd lang
  • Anuchhed/class6/Hin2nd lang
  • Hansi ka Baadsaah/Hindi 3rd lang/18.01.2021/objective
  • Hansi ka Baadsaah/Hindi 3rd lang/18.01.2021
  • Mai sabse chhoti Hou/ Hin2nd lang/ 17.01.2021
  • Annuchhed lekhan/17.01.2021/Hindi 2nd lang
  • Mai sabse chhoti Hou/hin2nd Lang/14.01.2021
  • Hansi ka Baadsaah/Class8/ Hindi 3rd lang
  • Mai sabse chhoti Hou/ Hin2nd lang
  • Patra lekhan/class 6/Hindi 2nd lang
  • Hansi ka Baadsaah/Hindi 3rd lang
  • Jo dekhkar bhi nahi dekhte(bhasa ki baat)/Hindi 2nd lang
  • Bure phase mantri/ Class8/ hin3rd lang/04-01-2021
  • Jo dekhkar bhi nahi dekhte-3/Hin2nd lang
  • Jo dekhkar bhi nahi dekhte-2/Hindi 2nd lang
  • Jo dekhkar bhi nahi dekhte
  • Chalna hamara kaam hai/Hindi 3rd lang
  • Apathith gadyansh(20/12/2020)
  • Case study(18/12/20)
  • Sandhya Revision
  • Chalna hamara kaam hai/Class 8/2-12-20
  • Case study/class6/Hindi 2nd lang
  • Revision class6/2-12-20
  • Karak/class6/Hindi 2nd lang
  • chalna hamara kaam hai/Class8/ Hindi 3rd Lang/30-11-20
  • Jhansi ki Rani/Class 6/hin2nd lang/26-11-20
  • Bure phase mantri/ Class8/ hin3rd lang/23/11/20
  • Jhansi ki Rani/Class 6/hin2nd lang
  • Bure phase mantri/ Class8/ hin3rd lang
  • Ticket Album/class6/ Hindi 2nd lang
  • Bure phase mantri/ Class8/ Hindi 3rd lang
  • Ticket Album
  • Class6/jhindi 2nd lang
  • Apathith gadyansh/5-11-20
  • Practice Hindi 3rd Language
  • Kahani lekhan 4/11/20

  • Poem writing/Hindi 3rd Lang/class8
  • Story writing 2/11/20
  • Apathith gadyansh 1/10/20
  • Punravriti/class 8/Hindi 3rd Lang
  • Class/Hindi 2nd Lang/punravriti
  • Class8/Hindi 3rd Lang
  • Upsarg/class6/hin2nd lang
  • Comprehension/Hindi2nd Lang/class6
  • Comprehension/hin2nd lang/Class 6
  • Case study/ class6/24.09.20
  • Ma kah ek kahani/ Class8/hnd3rd
  • Case study/ class6/hin 2 nd
  • Kahani lekhan/Hindi 2nd Lang/class6
  • Ma kah ek kahani/ Hindi 3rd lang/class 8
  • Story writing/16/09/20
  • Kriya Visheshan...
  • Saathi Haath Badhana/10/09/20
  • Paar Nazar ke 09/09/29

  • Everest ki choti se/09-09-20/Hindi 3rd Lang/class 8
  • Everest ki choti si (7/09/20)
  • Avyas karya7/9/20
  • Anuchhedh lekhan(03/09/20) class 6 Hindi2nd Lang
  • upsarg aurPratyay class 6 Hindi2nd Lang
  • Upsarg class 6 Hindi2nd Lang
  • Aksharon ka mahatwa 4 class 6 Hindi2nd lang
  • Aksharon ka mahatwa -3 Class 6 Hindi 2nd lang
  • Everest ki choti se Class8 Hindi3rd Lang
  • Dharti Baba class 8 Hindi 3rd Lang(part2)
  • Dharti Baba class 8 Hindi 3rd Lang
  • Aksharon ka mahatwa 2
  • Class 6,Hindi 2nd lang(Aksharo Ka mahatwa)
  • Upsarg AUR pratyay 31/08/20
  • Pratyay 29/08/20 Hindi 2nd lang कार्य
  • Upsarg abhyash 27/8/20
  • 1.Dharti Baba 2.humko hai (Hindi 3rd lang)
  • Dharti...Baba(Hindi3rd Lang)24/8/20
  • Anuchhedh lekhan(24/08/20) Hindi 2nd lang
  • Apathith gadyansh(Hindi2nd Lang)19/08/20
  • Dharti Baba
  • Patra le...khan Hindi 2nd lang
  • aksharo Ka mahatwa( Hindi 2nd lang)(extra)
  • aksharo Ka mahatwa( Hindi 2nd Lang)
  • aksharo Ka mahatwa* Compherension
  • Case study.....
  • Tenalirama multiple choice questions
  • तेनालीराम अभ्यास के प्रश्न
  • Apathith gadyansh periodic 1
  • Visheshan worksheet
  • Sangya practice
  • Chand se thori si gappe...
  • Hindi unseen
  • Apathith gadyansh Solution
  • Apathith gadyansh...
  • Apathith gadyansh.............
  • Apathith gadyansh.
  • Bachpan
  • Bisheshan
  • Chand se thori si gappe
  • Patra Lekhan Example
  • Upsarg...
  • Upsarg.
  • Gadyansh
  • Anopchsric Patra lekhan
  • Patra lekhan
  • Upsarg and pratyay
  • Woh Chiriya Jo
  • Upsarg pratyay
  • Kabir ki Sakhiya
  • Lakh ki Churiya
  • Dhavni...
  • Model Question Paper...
  • Model Question Paper..
  • Model Question Paper.
  • BHASHA AUR VYAKARAN..
  • Upsarg AUR pratyay...
  • Syllabus..
  • Syllabus.
  • Bus ki Yaatra..
  • Sangya ubhyas
  • Upsarg AUR pratyay.
  • BHASHA AUR VYAKARAN....
  • Bus ki Yaatra.
  • Nadaan Dost
  • Bus ki yatraa summary
  • Lahasa ki Oor..
  • Lahasa ki Oor Question answer2
  • Lahasa Ki Oor...
  • Lakh ki Churiya....
  • Naadan Dost...
  • Lahasa Ki Oor.......
  • Dhavni.
  • Naadan Dost.
  • Nadaan Dost Explanation 3
  • Sandhi
  • Lahasa Ki Oor Compherension 2.
  • Lahasa ki kore comprehension 1
  • Nadaan Dost Explanation 2
  • Lahasa Ki Oor.
  • Naadan Dost Explanation 1
  • Vyanjan sandhi
  • Lahasa ki oor explanation 2
  • Lahasa ki kore explanation
  • Swar Sandhi-last part
  • Sangya last part
  • Swar-sandhi6
  • Lahasa ki oor
  • Sangya4
  • Swar Sandhi-4
  • Sangya3
  • Sangya2
  • Patra lekhan1
  • Anuchhedh lekhan1
  • Nibandh
  • Apathith gadyansh
  • BHASHA AUR VYAKARAN Practice
  • BHASHA AUR VYAKARAN Practice work
  • Upsarg AUR pratyay exercise
  • Lakh ki Churiya questions answer
  • Bachpan comprehension 1
  • Pratyay
  • Upsarg
  • Bachpan Explanation-2
  • Lakh ki Churiya Compherension-2
  • Lakh ki Churiya comprehension
  • Kabir Question and answers

  • Bachpan Explanation

  • Lakh ki Churiya Compherension
  • Lakh ki Churiya Explanation
  • Woh Chiriya Jo BHASHA ki baat
  • Kabirdas sabad-1

  • BHASHA AUR VYAKARAN
  • Do bailo ki katha text question answers
  • Woh Chiriya Jo text question answers
  • Do bailon ki katha explanation and comprehension last part
  • Informal letter
  • Do bailon ki katha explanation and comprehension part2
  • Class 8 Hindi Formal letter...
  • Do bailon ki katha explanation and comprehension
  • Woh chiriya jo comprehension
  • Dhavni poem questions and answers,( ,intext)
  • Woh chiriya jo poem comprehension 2
  • Woh chiriya jo poem full explanation
  • Woh chiriya jo poem comprehension
  • Hindi Dhvani poem comprehension
  • Dhavni full poem explanation
  • Do bailon ki katha udesheya and lekhak parichay...
  • Hindi Kabir ki sakhiyan full series....
  • Hindi Samvad
Satish Chandra Memorial School
Satish Chandra Memorial School
Session Year:
  • Welcome,
    • Update Password
    • Logout
Satish Chandra Memorial School Developed by SCMS IT DEPT © 2026

Enter Student ID